आसमान की चादर

25 Jun आसमान की चादर

रौनक लौट आयी
भीनी भीनी खुशबु हवा में समाई
मैं अभिभूत हूँ
देख तुम्हारे विचारों की गहराई
देखो ज़रा
आसमान की चादर भी कैसी जगमगायी
मन में मेरे है कशमकश
तुम तुम ही हो या हो मेरा ही अक्स
ढूँढना चाहे कोई तो भी ना ढूंढ सकेगा
तुम जैसा ओर कोई शख्स