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अपने पिता की सुनना

अंजानो की चाह में
बेफिक्री की राह में
फूल बरसते हैं
कुछ हैं जो ऐसे भी सोचते हैं
अपनों का दिल दूखाना
कर्मो से जी चुराना
और सपनो में गोते लगाना
कुछ तो ऐसा भी करते हैं
अपनी कहना सबकी सुनना
मुश्किलों में भी हंस हंस के जीना
बड़ा मुश्किल है इनको समझना
उनकी आँखों में अपने मलए
तुमने भी
रास्तो को अपने
मंजिलों से मिलते देखा होगा
वो वही हैं जिनके बारे में
हमने तुमने सोचा जरुर होगा
इस दफा उनके संग अकेले में
कुछ वक़्त जरुर गुजारना
अपने पिता की सुनना
जो वो कहे तो
बुरा नहीं होगा
खुद को सुधारना

This post was last modified on September 9, 2017 10:12 am

" Alok Yadav : ."