हमने कान्हा को ढूढ़ लिया

13 Jun हमने कान्हा को ढूढ़ लिया

तरस रहे हैं तेरी आस में |
भटक रहे हैं तेरी तलाश में |
ओ मेरे कान्हा तेरे बिना हम तन्हा |
जानते हो हमें फिर क्यूँ परखते रहे |
नाम तेरा ही हम हर पल जपते रहे |
धीरे – धीरे महसूस किया |
भटके हुए ने कुछ ढूंढ़ लिया |
हम बेवजह परेशान हो रहे थे |
तू तो मुझही में था ,
हम तेरी प्यास में कहाँ – कहाँ फिर रहे थे |
जानते हो हम अब सिर्फ कर्म कर रहे हैं |
फल की अब चिंता नहीं , हम तो अब हर पल को जी रहे हैं |

Tags: