जब जब तुम्हे देखा

16 Jun जब जब तुम्हे देखा

आज साधारण सी दिखती
हर बात निराली है
इस घूँघट के पीछे छिपी
कोई शाम मतवाली है
जहां की रोशनी से छुप रही हो
या इस जहां को बनूर कर रही हो
धीमे -धीमे आती हो
जैसे चांदनी रात निराली है
बेजुबान हम हुए
जब जब तुम्हे देखा
फिर जवां हम हुए