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जो रुक जाता

माना शुरुवात में
हम हम ना थे
पर हालातों ने हमको
बदल के रख दिया
और फिर कुछ ऐसा हमने किया
की हर किसी की नज़र में
जैसे पल भर में सवेरा हो गया
जो रुक जाता
फकसी की बातों में आ जाता
तो कैसे अपनी मंजिल से
इस जहां का नज़ारा कर पाता
काश हर सपना मेरा तुम्हारा
बन उस गगन मे टिमटिमाता

This post was last modified on September 9, 2017 10:11 am

" Alok Yadav : ."