फूलों कि सेज

26 Jun फूलों कि सेज

माँ का करेज
हिफाजत कि रेल
रिश्तों का मेल
कुछ ऐसा हि है
बचपन का खेल
बड़े बड़े सपनों की
इमारत रखते हैं
कभी कभी मासूमियत में
इतिहास रचते हैं
हर पल
एक सुनहरी सी दुनिया कि छाया
माँ तेरे आँचल में दिखती है
चाँद-सितारों कि दुनिया भी
तेरी गोद को तरसती है