यूँ बेहोशी में ज़िंदगी बसर करेंगे

22 Jun यूँ बेहोशी में ज़िंदगी बसर करेंगे

नशा करेंगे
तबाह करेंगे
जब तक जियेंगे
पल पल मरेंगे
कहते हैं हम ना डरेंगे
और फिर वही कही
किसी गड्ढे में जा गिरेंगे
जिस देश को
मजबूत कंधो की जरुरत हो
मिटटी को सोना बना दें
जिनकी ऐसी फितरत हो
जब वही खुद पर से भरोसा खो देंगें
यूँ बेहोशी में जिन्दगी बसर करेंगे
फिर दुश्मन हमारे
भला हमसे क्यूँ डरेंगे