Shayari ki Dukaan

17 Aug

किस चिंता में मैं दौड़ चला

किस चिंता में मैं दौड़ चला

उस बेरंग दिशा की और

देखा तो शर्मिंदा हुआ

सोच में पड़ा

क्यों पकड़ी ऐसी पतंग की डोर

सोच में मेरी क्यों खोट हुई

क्यों मन आँगन आया मेर चोर

भटकन को मजबूर हुआ

ठोकर खायी सो मजबूत हुआ

भले-बुरे का बोध हुआ

और हमने फिर सोच लिया

धीरे धीरे ही सही

पहुंचेगे कही न कहीं

जहा होगी हमारी भी पहचान

कहलायेगे इक दिन

हम भी एक इन्सान

 

16 Aug

अपने प्यार की खातिर

Romantic shayari

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अपने प्यार की खातिर

मैं निकल चुका था

जिन्दगी की धुप-छाँव में

बिखर चुका था

इरादों को सहेजने की खातिर

टूट चुका था

अंदाज मेरे कुछ

जुदा जुदा ही थे

शायद उस पल को मेर संग

खुदा ही थे

प्रेरणा जीने की

सपनों की इमारत

खड़ी करने की

जिद्द जाने कहाँ से आयी

रूकावटो की हद भी

हमने दूर भगायी

पाने तुम्हे निकले थे

नसीब में हमें मिली खुदायी

जिन्दगी रोशन हुई

हमारे प्यार को मिली गहरायी

 

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हम मस्त कलंदर

एक नग

जो नथनी बना बैठा है

काजल से तुम्हारी ऐठा ऐठा है

कंगन भी कुछ कम नहीं

पहला दूजे से रूठा बैठा है

पायल भी तुम्हारी

याद में हमारी

गा रही क़वाली

मेरी मासूम कली

मिश्री की डली

रूठो न यूँ की सूना सूना सा

हो जाता है मंजर

ज़रा हंस भी दो की

हो जाये हम मस्त कलंदर

हमारी जहाँआरा

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महसूस कुछ यूँ किया है

पी रहा हूँ अमृत

जिसका जिक्र हमने आज

पहली ही दफा किया है

अब जैसे हर पल  को

खुल के जिया है

किस्सा कुछ ऐसा ही है हमारा

हिस्सा हो चुके हैं हम तुम्हारा

बड़ी खूबसूरत है हमारी जहाँआरा

आदतें हमारी तुम पहचानती हो

तसवीरें बोल पड़ेंगी

तकदीरें जाग उठेंगी

बजने लगेंगी शेहनाईयां

लुट जाएँगी तनहाइयाँ

जब जब नज़रें तुम्हारी

हम से मुलाकातें करेंगी

आदतें हमारी तुम पहचानती हो

दूरियां हैं क्यूँ यह भी जानती हो

और क्या चाहे खुद से

जब तुम हमें अपना मानती हो

हीर राँझा काअवतार हो

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जो इश्क में हैं होते

वो वक़्त को जाया

यूँही नही किया करते

जहां से हैं गुजरते

लोग उन जैसा होने हैं लगते

बादल भी हैं जब जब बरसते

मोहब्बत को भीगाने को हैं तरसते

और प्यार में डूबना तो है एक कला

जो डूबा वो अपने खुदा से जा मिला

ज़रा ढूंढो अपने प्यार को

और जो ढूढ़ चुके हो तो

ज़रा समझो अपने यार को

महसूस करो उसके दीदार को

रब करे प्यार तुम्हारा सदाबहार हो

क्या पता तुम ही में अगले

हीर राँझा का अवतार हो

खुदा करे खुशियाँ तुम्हारे

जीवन में बेशुमार हो

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इन्द्रधनुष के सातोंरंग

अंदाज़ ए वफ़ा

कुछ ऐसा होगा

तेरा पल पल इन

आँखों में बयां होगा

रोम रोम मेरा

फिर से जवां होगा

ऐसा समा ओर कहाँ होगा

जब हम तुम होंगे संग

ढूंढ लेंगे हमें

इन्द्रधनुष के सातों रंग

बज उठेंगे ताल और मृदंग

जश्न में डूबेंगे

हम और हमारी हमदम

 

15 Aug

इबादत करें

इबादत करें

शुकराना करे

आरज़ू करें

बस तुम्हारी

चाहत करें

शराफत करें

खिदमत में तुम्हारी

हम सिमट रहे हैं

आरजूओ में तुम्हारी

समझो जरा कुदरत के इशारे

हम हैं बस तुम्हारे सहारे

जन्नत मिली हैं मुझे

कभी बैठा था मैं सुनसान किनारे

कभी ना भूलेगे हम

ये एहसान तुम्हारे