Shayari ki Dukaan

14 Aug

ये दुनिया

ये दुनिया

ये जहाँ

इश्क की कीमत

इश्क की जीनत

मोहब्बत का पैमाना

क्या समझते

वो तो तुम थी

नही तो किसे पता

हम कहाँ तडपते

घूँट प्यार का

बूँद-बूँद ऐतबार का

सिला तुम्हारी फितरत है

मुझ जैसे अन्जान का

ऐतबार करा

कितनी हसीन तुम्हारी सीरत हैं

जिन्दगी हमारी तुम्ही से खूबसूरत हैं

इक तुम्हारा साथ ही अब

मेरे जीवन की जरूरत है

13 Aug

ओ मेरी रानी

ओ मेरी रानी

मेरी कहानी

क्यूँ तुम मेरी दीवानी

तुम हो कितनी सयानी

उस खुदा की रहमत से अनजानी

दीदार को तुम्हारे तरसती

जाने कितनी जिंदगानी

जाने फिर भी क्यूँ तुम मेरी दीवानी

मैं नादान

इस दुनिया से अनजान

कहते को इंसान

पर मेरी इक तुम्ही पहचान

जीवन भर रहे मेरे चेहरे पे

तेरी दी हुई मुस्कान

तुम्हारा प्यार ही हैं

मेरी जिन्दगी की शान

मेरी खुशियाँ

तुम्हारा दिया हुआ दान

मैं कौन

मेरी तुम हो आन

अंदाजा कोई क्या लगाएगा

तुम्हारी खातिर मेरा साया भी

सूली चढ़ जायेगा

वक्त जैसे-जैसे गुजरता जायेगा

हमारा प्यार सुनहरे रंगों का

इन्द्रधनुष बन

उस आकाश में लहराएगा

जिसे देख हर किसी के दिल में

मोहब्बत का सुरूर एसा छाएगा

की नफ़रत फ़ैलाने वालो का

खुद ही पर से ऐतबार उठ जायेगा

और उसी पल

तुम्हारा मेरा इश्क

गंगा की लहरों सा

चांदनी रात के उजालो सा

हर किसी के दिल को

रोशन कर जायेगा

दिल मेरा एक सवाल

फिर से दोहराएगा

क्या तेरा मेरा प्यार

अगले जनम भी यूंही गुनगुनाएगा

13 Aug

प्रधानसेवक

औरत को डायन समझ
जिस समाज मे
यातनाएं दी जाती हैं

जहां कुछ पैसों की खातिर
पंचों द्वारा बेगुनाहों को
सजा सुना दी जाती है

जिस सभ्य समाज में
औरत , वृद्ध और बच्चों
की सुरक्षा से ज्यादा
गोरक्षा की बातें की जाती हैं

वहां प्रधानसेवक द्वारा की जा रही
विकास की बातें
गले के नीचे उतर ही नही पाती हैं