Shayari ki Dukaan

13 Aug

Yogi ram raj

वाह रे सटोरियों
जान गैरों की
बड़ी सस्ती समझते हो

हम रोते रहें
चीखते बिलखते रहे
और तुम हँसते हो

दिन वो दूर नही
कफन तुम्हारे अपनो
के भी सजे होंगे

आँसूं कभी तुम्हारी
आंखों के भी
सूखने को होंगे

वजह आज
कुछ और हो गयी
गरीब के मरने की

दर्द सिर्फ इतना ही है
इस सीने में
की कल जो था
मेरा अपना सा

वो सत्ता के गलियारों में
जब से पहुंचा
मैं उसके लिए
क्यों हुआ भूला बिसरा सा

12 Aug

जब भी कोई ख्वाब पूरा हुआ

जब भी कोई ख्वाब पूरा हुआ

मेरा मन जैसे सुनहरा-सुनहरा हुआ

तुमसे जब जब मिलना हुआ

जहन में मेरे एक सवाल पुख्ता हुआ

की इतना हसीना ख्वाब

मेरा न जाने कैसे हुआ

किस तरह न जाने

मेरा मुकद्दर मुझपे मेहरबान हुआ

कैसे मेरे नसीब में फूलो का गुलिस्ता हुआ

कौन से कर्म की

या मेर धरम की

न कहना अब की मैनें लिखने में शर्म की

तुम मिली मुझे

क्यूकि खुदा ने मुझ पर रहमत की

11 Aug

सपनों की दुनिया

सपनों की दुनिया

में हकीकत के फ़साने

बंद आँखों के सपने

होते हैं लुभावने

दुनिया क्या जाने

मेरे सपनों की कीमत

मेरी मोहब्बत ही है

मेरी ज़ीनत

क्या कह रहा हूँ

क्या सोचा रहा हूँ

हकीकत से

दो दो हाथ कर रहा हूँ

एक गैर की चाहत में

दिन रात एक कर रहा हूँ

उस खुदा की रहमत हो

बस यही इन्तजार कर रहा हूँ

बस कुछ करने की ख्वाहिश थी

पर अपनों की खातिर

आज उनके ख्वाबो को जी रहा हूँ