Shayari ki Dukaan

10 Aug

मैं तुमको चाह कर भी

मैं तुमको चाह कर भी

चाह ना सका

मैं तुमको पा कर भी

पा न सका

अब अंधेरे में तुम्हारी

जुस्तजू की

क्यूँ फिर हमने तुम्हारी आबरू

की कद्र ना की

सब्र कैसे करे की

हम सदमे में हैं

किससे कहें

बेहतर होता की

वक्त पे काबू रख पाते

हम उन पलो के

दाग धो पाते

काश तुम जब भी कही जाती

हम तुम्हारे साथ हो जाते

09 Aug

प्यार तुम्हारा पाया

प्यार तुम्हारा पाया

रोशन हुआ मेरा साया

रात हो या दोपहर

बरसा रही हो

अपने हुस्न का कहर

जिस्म में लगी है आग

तुम्हे छूने भर से

तुम्हे पाने की ख्वाहिश रखते हैं

न जाने कब से

प्यास के अंगारे को और न भडकाओ

तडप रहा हूँ में

मेरी यह आग बुझाओ

आओ जरा पास हमारे

और प्यार की अलख जगाओ

love shayari
08 Aug

आज फिर सवेरा हुआ

आज फिर सवेरा हुआ

लेकिन सुनहरा हुआ

आगोश में तुम्हारे गुजारी थी

जो कल की रात

काश होता तुम्हारा हमारा

पल पल का साथ

रात हो जाती यूँही लिए

हाथों में हाथ

तुम्हारी साँसो में बस जाएँ हम

ये जिन्दगी यूँही गुजर जाये

तो न रहे कोई गम

चाहत से सराबोर हैं

तुम्हरे प्यार में मदहोश है

बहते झरने के मीठे जल

की मीठास लिए

मोहब्बत में अपने होठो को सिए

कुछ कह रही हैं

तुम्हारी खामोशियाँ

जैसे चाह रही है

थोड़ी और नजदिकिया