तेरे कदमो पे करते हैं निसार

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15 Jun तेरे कदमो पे करते हैं निसार

मेरी ख्वाहिशों को रंगीनियत का एहसास दिला रही
मेरे ख़्वाबों में तुम इस कदर छा रही
जन्नत की मन्नत अब हम क्यूँ करें
आशियाने में अपने तेरी जुल्फों में क्यूँ न डूबा करें
इतनी हसीन हो और कहती हैं तारीफ़ भी न कया करें
ज़िंदगी को गुलाबों से महका के
मुझे अपना बनाके
तेरे एहसान हम कैसे चुकाए
तेरा एहसास हम कैसे भुलाएं
जीवन की रफ़्तार
रुक -रुक कर रही इश्तिहार
तेरे कदमो पे करते हैं निसार
यह दुनीया यह जहां यह बहार