हम मस्त कलंदर

25 Jun हम मस्त कलंदर

एक नग
जो नथनी बना बैठा है
काजल से तुम्हारी ऐठा ऐठा है
कंगन भी कुछ कम नहीं
पहला दूजे से रूठा बैठा है
पायल भी तुम्हारी
याद में हमारी
गा रही क़वाली
मेरी मासूम कली
मिश्री की डली
रूठो न यूँ की सूना सूना सा
हो जाता है मंजर
ज़रा हंस भी दो की
हो जाये हम मस्त कलंदर