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जाने कहाँ गया वो रेत का बवन्डर

तमन्नाओ के सागर में हिलोरे
ले रही थी जिंदगी मेरी
अकेलेपन में भीगी हुई थी
आदते मेरी
फिर उनसे मुलाक़ात हो गयी
और वो हमारे साथ हो गयी
वो कहती रही हम सुनते रहे
फूल उनकी पसंद के चुनते रहे
हुआ ऐसा जो ना कभी देखा था
कुछ ऐसा जो ना कभी सोचा था
आज चारो ओर है खुशियों का समंदर
जाने कहाँ गया वो रेत का बवन्डर

This post was last modified on September 9, 2017 10:13 am

" Alok Yadav : ."