जिन्दगी में

01 Jul जिन्दगी में

कुछ ख्वाब अधूरे रह गए|
मौत की ख्वाहिश में
न जाने कितने पल
जीवन से महरूम रह गए|
हाथ कुछ ना आया
और हम मजबूर हो गए|
बेबस समझ खुद को
जाने क्यों दुनिया को
अलविदा कह गए|
मौत कि तलाश में
किसी के प्यार में
हम गुमनाम हो गए|
परछायी से खुद ही की
हम पूछ रहे,
क्यों अब तलक
हमारे साथ है|
जिस कि ख्वाहिश हमने की
वो आज किसी और की
परछायी है|
हमारी गुमनामी
जीवन मे उनके
क्या खुब रंगत लेकर आयी है|