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Sanam teri kasam shayari

Sanam Teri Kasam Shayari

किसी किताब के पन्नो में छिपा

जब वो लाल सुर्ख़ गुलाब देखा,

मेरी आँखों ने उसी पल

वो ज़ालिम दिलदार देखा।

वो दिलदार जिसने चुना था

मेरे मन तरंग को,वो दिलदार

जिसने भरा था

मेरे जीवन में नयी उमंग को,

हाँ वही बस वही

अपना पहला अधूरा प्यार देखा।

वो प्यार था मेरा पहला

जिसने मुझमे अपना ईमान देखा,

वो दीवानगी थी पहली मेरी

जिसमे खुद को  फ़ना होते देखा।

पर जब आया किस्सा-ए-आशिक़ी

ज़माने की निगाहों में,

तो बुरी नजरो के साये में

कोहिनूर से भी कीमती

अमानत को तार तार होते देखा।

क्या होती है जुदाई,

क्या होती है दर्द-ए-रुसवाई

इन सभी एहसासों से

अपनी ख्वाबो की

दुनिया को बेज़ार होते देखा।

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ए सनम यार मेरे
कैसे चुकाएंगे
एहसान तेरे

प्यार में डूबे
रहते थे
हम भी कभी
आज अनजान से
खड़े हैं
एक दूजे के सामने

क्यों भूल गए
उस प्यार को
वफ़ा ए इजहार को

ए सनम तेरी कसम
किसी को ना देखा
नज़रें उठाके
इंतेज़ार में तेरे

Shayari of Sanam teri kasam

जा तो रही हो
हमें यूँ रुसवा करके ,
पर याद रखना
तुम भी याद करोगी
हमे रो रो के ।।
तब ना हम होंगे
होंगी तो बस
हमारी खामोशियाँ ,
किस्से,कहानी
बन जाएंगे हम
याद करोगी
हमारी कुर्बानियां ।।

This post was last modified on May 12, 2019 10:52 am

Categories: Sad Shayari
" Alok Yadav : ."