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थोड़ी सी जोर अजमाइश

मुश्किलों को आने की
चुनौती दे दो
मन की आँखों को
ज़रा सा खोल दो
थोड़ी सी जोर अजमाइश
जब वो करने लगे
हर कोशीश में वो
जब तुम्हे ठगने लगे
मौका उन्हें ज़रा भी ना देना
देखना उन्हें संभलने भी ना देना
कुछ ही देर में वो बिखर जायेंगी
देखते ही देखते वो
तुम्हारे कदमो की धूल खायेंगी
मुश्किलों की चुनौनतयां
यूँ ही आएूँगी जायेंगी
जब तुम जैसे होंगे मुसाफिर
वो अपनी राह भटक जायेंगी

This post was last modified on September 9, 2017 10:14 am

Alok Yadav :