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वक़्त भी कर्मो के अधीन

ना डरे
बस करे
वो जिसपे हमें यकीन है
क्यूंकि………..
वक़्त भी कर्मो के अधीन है
जिक्र जब ही से करने लगेंगे
अपनी परेशानियों का
फिक्र नहीं, निभाने लगेंगे
फ़र्ज अपनी जिम्मेदारियों का
फिर धीरे धीरे जीवन संवरने लगेगा
मंजिल दूर ही सही
पर रास्ता सुनहरा बन पड़ेगा

This post was last modified on September 9, 2017 10:12 am