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तेरे कदमो पे करते हैं निसार

मेरी ख्वाहिशों को रंगीनियत का एहसास दिला रही
मेरे ख़्वाबों में तुम इस कदर छा रही
जन्नत की मन्नत अब हम क्यूँ करें
आशियाने में अपने तेरी जुल्फों में क्यूँ न डूबा करें
इतनी हसीन हो और कहती हैं तारीफ़ भी न कया करें
ज़िंदगी को गुलाबों से महका के
मुझे अपना बनाके
तेरे एहसान हम कैसे चुकाए
तेरा एहसास हम कैसे भुलाएं
जीवन की रफ़्तार
रुक -रुक कर रही इश्तिहार
तेरे कदमो पे करते हैं निसार
यह दुनीया यह जहां यह बहार

This post was last modified on September 9, 2017 10:19 am