कृतिका की ताशु

15 Jun कृतिका की ताशु

आज कृतिका को देखने लड़क वाले आ रहे हैं । सभी घर वाले तैयारियों में मशरूफ हैं । सभी के दिल में यही ख्याल है की कृतिका को लड़का पसंद आ जाए । कृतिका से छोटी दो और बहिने है । कृतिका की उम्र भी निकल जा रही है , और छोटी बहने बड़ी हो रही हैं। कृतिका के पिता नहीं हैं , उनका स्वर्गवास लंबी बीमारी के चलते हो गया था । तभी से घर की जिम्मेदारी कृतिका ही संभाल रही है। कृतिका मेहनती थी , तभी तो सरकारी नौकरी का इम्तिहान पास कर वो सरकारी मुलाजिम हो चुकी थी , वही पर एक सहकर्मी रवि से उसकी मुलाकात हुई और मन ही मन वप उसे चाहने लगी , पर दिल की बात जुबान पर आते – आते रुक जाती । वो चाह कर भी अपने दिल की बात रवि से ना कह सकी । वैसे रवि कई दफा बातों – बातों में कृतिका के सामने शादी का प्रस्ताव रख चुका है । जो वो हंसके टाल जाती थी । आज रवि ही के घर वाले कृतिका को देखने आ रहे हैं। कृतिका रवि के घर वालो को बेहद पसंद आई और दोनों परिवारों की रज़ामंदी से उनका रिश्ता भी तय हो गया । रवि और कृतिका अब पति – पत्नी हो चुके थे । दोनों बहुत खुश थे और उनके परिवार भी । शादी के बाद लड़के बदल जाते हैं – यह बात कृतिका की सहेली ने कुछ दिन पहले बातों – बातों में कृतिका से कही थी । जब से कृतिका क शादी रवि से पककी हुई , तभी से उसे यह बात बार – बार याद आ रही थी। शादी के बाद से कृतिका इतनी चुप – चुप सी रहने लगी । रवि सोच में था हमेशा खिलखिलाने वाली कृतिका इतनी चुप – चुप क्यों रहने लगी है। रवि ने कृतिका से जब इस बात करनी चाही , तो कृतिका ने पहले तो कहा कोई बात नहीं , पर जब रवि ने ज़ोर दिया । तो कृतिका ने बताया की कैसे उसे अपनी सहेली की बात बार बार याद आ रही है , जिसक वजह स वो कुछ परेशान सी है । यह बात सुनते ही रवि ने कृतिका को अपनी बाहों में भर लिया । कृतिका ने इतना सुकून न पहले कभी महसूस नहीं किया था , जितना आज रवि की बाहों में महसूस कर रही थी। वो पल था और आज का पल कृतिका की जिन्दगी बहुत प्यार में गुज़र रही थी । शादी के एक साल बाद कृतिका और रवि माता पिता बन चुके थे । ताशु नाम की गुडिया ने उनकी झोली खुशियों से भर दी , उन्हें लग जैसे ज़माने भर म वो सबसे खुशकिस्मत हैं । रवि और कृतिका की जिन्दगी ताशु के इर्द गिर्द घुमने मने लगी । ताशु भी धीरे धीरे बड़ी हो रही थी और संस्कारी भी । सभी कृतिका और रवि की परवरिश की सराहने किया करते । अब जब भी कभी कृतिका को अपनी सहेली की बात याद आती की शादी के बाद लड़के बदल जाते हैं , वो शर्मा जाती और सोचने लगती की अगर रवि ने उस दिन समझदारी ना दिखाई होती तो मैं खुद की जिन्दगी रवि पर शक कर क जाने  किस दोराहे पे ल जाती । कृतिका अब समझ चुकी थी की खुशिया अपने ही हाथों में है , क्योंकि हमारी सोच भी हमारी अपनी ही बनायीं होती है ।

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अपनों को अपनों की
सपनो को सपनो की
अपनों के सपनो को
सपनो में अपनों की
इतनी सी ख्वाहिश को
पूरा करने को
अपनों की इजाजत की
रब की इबादत की
बस एक चाहत की
और एक कदम बढाने की
जरूरत महसूस जो करो
तो सपनो में अपनों को
शामिल किया करो

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