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15 Aug

इबादत करें

इबादत करें

शुकराना करे

आरज़ू करें

बस तुम्हारी

चाहत करें

शराफत करें

खिदमत में तुम्हारी

हम सिमट रहे हैं

आरजूओ में तुम्हारी

समझो जरा कुदरत के इशारे

हम हैं बस तुम्हारे सहारे

जन्नत मिली हैं मुझे

कभी बैठा था मैं सुनसान किनारे

कभी ना भूलेगे हम

ये एहसान तुम्हारे

21 Jul

काश तुम मुझपे विश्वास कर सकती

काश दिल की बातें दिल में न रहती
काश मेरी ख्वाहिशे बन कागज की कश्ती
यूँ ही दरिया में न बहती
काश मेरे दर्द की कसक
सीने में तेरे न चुभती
काश मेरे आँखों की नमी
तेरी आँखों में न उतरती
काश की तुम उस पल को मेरे
आस-पास ही होती
काश मेरी शामें
यूँ तनहा तनहा सी न होती
काश की तुम हालातों को मेरे
यूँ दरकिनार न करती

01 Jul

जिन्दगी में

कुछ ख्वाब अधूरे रह गए|
मौत की ख्वाहिश में
न जाने कितने पल
जीवन से महरूम रह गए|
हाथ कुछ ना आया
और हम मजबूर हो गए|
बेबस समझ खुद को
जाने क्यों दुनिया को
अलविदा कह गए|
मौत कि तलाश में
किसी के प्यार में
हम गुमनाम हो गए|
परछायी से खुद ही की
हम पूछ रहे,
क्यों अब तलक
हमारे साथ है|
जिस कि ख्वाहिश हमने की
वो आज किसी और की
परछायी है|
हमारी गुमनामी
जीवन मे उनके
क्या खुब रंगत लेकर आयी है|