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26 Jun

फूलों कि सेज

माँ का करेज
हिफाजत कि रेल
रिश्तों का मेल
कुछ ऐसा हि है
बचपन का खेल
बड़े बड़े सपनों की
इमारत रखते हैं
कभी कभी मासूमियत में
इतिहास रचते हैं
हर पल
एक सुनहरी सी दुनिया कि छाया
माँ तेरे आँचल में दिखती है
चाँद-सितारों कि दुनिया भी
तेरी गोद को तरसती है

26 Jun

आदत है हमारी

आदत है हमारी
ठोकरे कितनी भी खाए
उतरनी नहीं खुमारी हमारी
चाहे हम टूट कर बिखरक्यूँ न जायें
पीठ पीछे हम न जाने
क्या क्या कहलाए
फिर भी धुल न झोंक पाएं
हर रास्ते हर मंजिल
हर आएने कि कसक
जाने कहाँ कहाँ
बिखरी पड़ी है
मेरे सपनो कि कि झलक
पर में न भूला था
न भूलूंगा
साँसेचल रही हैं
जब तलक

26 Jun

ना रोको खुदको

ना किसी को
करने को मनमानी ।
बड़े बड़े सबक सिखला जाती
यह नशीली जवानी ।
सन्नाटो में ना दोडो
लेकर अपनी आवाज ।
ना रखो में कोई राज ।
जरा सुना दो
हमे भी साज ।
जिसे याद कर आती आ जाती है
दिल से तुम्हारी भी आवाज ।
आने वाला वक़्त है
हम सभी के लिए खास ।
हो जाओ तेयार
आओ मिलकर करें
एक परयास।
जिसकी आस में शहीद हुए
भगत और आवाज ।

25 Jun

ऊूँची उड़ान भरने को

तरक्की की चाहत लिए
वो बस चल दिए
किसी ने रोका
किसी ने टोका
शायद वो उनकी
फितरत से अनजान थे
या यूँ कहे की नादान थे
ऊूँची उड़ान भरने को
उनके पंख फड फड़ा उठे
कुछ नया करने की आदत में
वो बरसो की नींद से जाग उठे
बैठे -बैठे वो भी सपनो में ढूब जो जाते
कुछ करने के वक़्त बस बाते वो बनाते
तो हम थे जहा बस वही रह जाते
चूल्हा जलाने की खातिर
हम तुम आज भी
पत्थरों को रगड़ खिलाते

25 Jun

एक महात्मा हमारे जीवन में उतरा

चुन चुन के खुशियाँ
उसकी झोली में भर
घूंगरू से प्यार बेपनाह कर
राजू ने रोज़ी के
दिल के आँगन में
ऐसा गुलिस्तान बसाया
की फूनों की खुशबूं से
रोजी का पल पल महकाया
दोनों कि दुनीया
गजब की सज चुकी थी
राजू के माथे पे
रोजी के पैरो की धुल थी
दुनिया कह रही थी
रोजी भी ओरों के कहने में आ
राजू को खुद से दूर कर चुकी थी
हाँ वो रोयी थी
पछताई भी थी
शायद यही राजू के प्यार की
गहरायी थी
वहाँ राजू तो खुद को बदल चुका था
उस खुदा का उसे एहसास
जो हो चला था
लोगों के विश्वास से
उसे भी आस का साथ हो चला था
एक महात्मा हमारे जीवन में उतरा
जिसने कहा था हम ही हैं
उस खुदा का कतरा कतरा

zindagi shayari in hindi font
24 Jun

अपने पिता की सुनना

अंजानो की चाह में
बेफिक्री की राह में
फूल बरसते हैं
कुछ हैं जो ऐसे भी सोचते हैं
अपनों का दिल दूखाना
कर्मो से जी चुराना
और सपनो में गोते लगाना
कुछ तो ऐसा भी करते हैं
अपनी कहना सबकी सुनना
मुश्किलों में भी हंस हंस के जीना
बड़ा मुश्किल है इनको समझना
उनकी आँखों में अपने मलए
तुमने भी
रास्तो को अपने
मंजिलों से मिलते देखा होगा
वो वही हैं जिनके बारे में
हमने तुमने सोचा जरुर होगा
इस दफा उनके संग अकेले में
कुछ वक़्त जरुर गुजारना
अपने पिता की सुनना
जो वो कहे तो
बुरा नहीं होगा
खुद को सुधारना

24 Jun

हाँ हम लड़ेंगे

जीने को बहाने हैं हज़ार
पर यकीन है
तुम संग आएगी बहार
कभी ना आने देंगे
एक दूजे के बीच में दीवार
रहेंगे हमेशा सपनो पे सवार
ना होने देंगे कभी ऐसे हालात
जहां हम दोनों के बीच बिगड़े बात
चुप ना रहेंगे
कुछ भी….. बस कहेंगे
हाँ हम लड़ेंगे
ऐसा जैसा कभी ना किया
फिर कहना प्यार का वो रंग
भी हमने कया खूब जिया
उन पलो में भी हमने तेरे
प्यार ही को महसूस था किया

24 Jun

रखते हैं एसी ख्वाहिश

जाने अनजाने में
हमारे फसानो में
आप कुछ यूँ शामिल हुए
जिंदगी में हमारी
वो निखर आया
भुला ना पाए
ऐसा प्यार पाया
परेिानियों में करते हैं
आप ही से गुजारिश
सपनो में हमारे रोज़ आया करो
रखते हैं ऐसी ख्वाहिश

24 Jun

मुझसे मेरा साया

मुद्दतो में किसी को
ऐसा प्यार नसीब है होता
वो है बदनसीब जो
उस पर से यकीन है खोता
कहते नहीं बनता
सपने जो था बुनता
हुबहू तुममे पाया
खुदा ने मिलाया
मुझसे मेरा साया

24 Jun

वक़्त भी कर्मो के अधीन

ना डरे
बस करे
वो जिसपे हमें यकीन है
क्यूंकि………..
वक़्त भी कर्मो के अधीन है
जिक्र जब ही से करने लगेंगे
अपनी परेशानियों का
फिक्र नहीं, निभाने लगेंगे
फ़र्ज अपनी जिम्मेदारियों का
फिर धीरे धीरे जीवन संवरने लगेगा
मंजिल दूर ही सही
पर रास्ता सुनहरा बन पड़ेगा