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13 Aug

ओ मेरी रानी

ओ मेरी रानी

मेरी कहानी

क्यूँ तुम मेरी दीवानी

तुम हो कितनी सयानी

उस खुदा की रहमत से अनजानी

दीदार को तुम्हारे तरसती

जाने कितनी जिंदगानी

जाने फिर भी क्यूँ तुम मेरी दीवानी

मैं नादान

इस दुनिया से अनजान

कहते को इंसान

पर मेरी इक तुम्ही पहचान

जीवन भर रहे मेरे चेहरे पे

तेरी दी हुई मुस्कान

तुम्हारा प्यार ही हैं

मेरी जिन्दगी की शान

मेरी खुशियाँ

तुम्हारा दिया हुआ दान

मैं कौन

मेरी तुम हो आन

अंदाजा कोई क्या लगाएगा

तुम्हारी खातिर मेरा साया भी

सूली चढ़ जायेगा

वक्त जैसे-जैसे गुजरता जायेगा

हमारा प्यार सुनहरे रंगों का

इन्द्रधनुष बन

उस आकाश में लहराएगा

जिसे देख हर किसी के दिल में

मोहब्बत का सुरूर एसा छाएगा

की नफ़रत फ़ैलाने वालो का

खुद ही पर से ऐतबार उठ जायेगा

और उसी पल

तुम्हारा मेरा इश्क

गंगा की लहरों सा

चांदनी रात के उजालो सा

हर किसी के दिल को

रोशन कर जायेगा

दिल मेरा एक सवाल

फिर से दोहराएगा

क्या तेरा मेरा प्यार

अगले जनम भी यूंही गुनगुनाएगा

zindagi shayari in hindi font
06 Aug

हम young हैं

जब तलक दिल में उमंग हैं

रस्ते तंग हैं

फीर भी जिंदगी जल-तरंग हैं

जेब कटी पतंग है

फिर भी आनन्द हैं

हम अकेले हैं

फिर भी कोई संग हैं

जाने कौन सी है लहर

पी जातें हैं

कैसे – कैसे कडवे जहर

जिन्दगी बरसाती रहती है

कहर पे कहर

आसान नहीं होती हैं

यह जवानी की डगर

फिर भी सह जाते हैं

कुछ बनने की छह में

निकल पड़ते हैं जो

बस वही young हैं

हर राही हैं अकेला

जिसने थामा जिन्दगी का रेला

यह जिन्दगी उसी के संग है

बस वही young हैं

बस वही young हैं

24 Jun

बस कुछ दिन और फिर

कहीं दूर बहुत अँधेरा था
रात सा सन्नाता
चारो और बबिर पड़ा था
और वो रोशनी की चाह लिए
देखे जा रहा था उस आसमान की ओर
जहां बिखरी हुई थी चकाचोंध चारो ओर
सोच में पड़ गया
कुछ ही देर में उसका
अंग अंग खिल गया
कल तक अमावस थी जहां
आज पूनम का चाँद है वहाँ
रोशन फिर तो मेरा जहान भी होगा
बस कुछ दिन और फिर
सब को मुझ पर भी गुमान होगा

17 Jun

वहीं तो रचा बसा होता हैं

बेदहसाब किताबे पढ़
कुछ कलमे गढ़
अनजानो ने सराहा
कभी कभी
मलिते मलिते
वो पा जाते हैं दोराहा
उन्हें भाता है रिश्तो का चोराहा
मलिने की आड़ में
खुद की पहचान में
वो बस चाहते हैं इक किनारा
वहीं तो रचा बसा होता हैं
उनकी खुशियों का नज़ारा
तो क्यूँ ना एक बार
ख्वाहिशो को अपनी
बहन दे मंजिलों तक अपनी
जहां बसती हो ऐसी बस्ती
आओ मिलकर करें
कुछ ऐसी करनी

17 Jun

दिल की दरख्वास्त

इस रूह का एक ही मकसद
इश्क में जियें
इश्क में खिलें
इश्क में उडें
इश्क में डाले
एक दूजे की बाहों में
बाहों के हार
नज़रों में तेरी करें
अपनी मंजिलो की तलाश
और बह चले
उन हवाओं की सनसनाती रुत में
जहां हो तो सिर्फ तेरे प्यार की प्यास
कुछ ऐसी ही है
इस छोटे से दिल की दरख्वास्त

17 Jun

मेरी आह निकल रही

कशिश तेरी आखों की
मेरे दिल में
यूँ जगह कर रही
दबी जबान से जैसे
मेरी आह निकल रही
मुस्कान तुम्हारी
होठों पर कुछ यूँ बिखर रही
बड़ी मुश्किल में हैं
हमारी जान
देखो अब कहीं जाके
हमारी सांसें संभल रही

17 Jun

कुछ कहना चाह रही थी

आज वो फिर नज़र आयी
धुंधलाती सी तस्वीर में
रंगों की रंगत ने
जैसे करामात दिखलाई
आज कुछ नया सा एहसास है
उसके हाथों में फिर मेरा हाथ है
लकीरों को खिंचने की चाहत लिए
वो खिलखिलायी
और वो हमारे करीब आयी
नदियों की धारा को लिए
वो बहती ही जा रही थी
धीरे धीरे आँखों में उसकी
शर्म सी छा रही थी
शायद
शायद वो
कुछ कहना चाह रही थी
आज वो हमें फिर से अपना
बना रही थी

17 Jun

राहों में तेरी

वक़्त तो वक़्त है
गुजर जायेगा
पानी भी अपनी राह
खुद ही बनाएगा
राहों में तेरी
मेरा आना
यूँही लगा रहेगा
कोई कुछ कहे
मेरा प्यार तुम्हे
यूँही मिलता रहेगा
जमाने गुजर जायेंगे
हम तुम फिर ना जाने
कितनी दफा
लौट लौट कर आयेंगे

17 Jun

तन्हाइयों क दौर पे दौर

मैं उनको निहारती रही
और वो उसको
मैं उनको बुलाती रही
और वो मिलते रहे उसको
तमन्ना तो मेरी भी थी
की वो मुझे अपना कहते
दर्द को मेरे वो रुसवा करते
तन्हाइयों क दौर पे दौर
गुजर गए
और हम यहाँ खड़े उन्हें
टकते ही रह गए
सिसक इन साँसों की
बयान कैसे करती
अपने इस जख्म को
भला कैसे सहती

17 Jun

दिला देती है एहसास

सफ़र ये आसान नहीं
जब हमदम साथ नहीं
कहीं बादल हैं
पर बरसात नहीं
कहीं उसके थमने के
आसार नहीं
हर ओर से जो
हो चुके थे निराश
आज उनको है अपनी
मंजिल की तलाश
जब लगती है प्यास
सबको होती है एक बूंद
से भी बड़ी सी आस
दिला देती है एहसास
कौन है कितना ख़ास