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09 Aug

प्यार तुम्हारा पाया

प्यार तुम्हारा पाया

रोशन हुआ मेरा साया

रात हो या दोपहर

बरसा रही हो

अपने हुस्न का कहर

जिस्म में लगी है आग

तुम्हे छूने भर से

तुम्हे पाने की ख्वाहिश रखते हैं

न जाने कब से

प्यास के अंगारे को और न भडकाओ

तडप रहा हूँ में

मेरी यह आग बुझाओ

आओ जरा पास हमारे

और प्यार की अलख जगाओ

love shayari
08 Aug

आज फिर सवेरा हुआ

आज फिर सवेरा हुआ

लेकिन सुनहरा हुआ

आगोश में तुम्हारे गुजारी थी

जो कल की रात

काश होता तुम्हारा हमारा

पल पल का साथ

रात हो जाती यूँही लिए

हाथों में हाथ

तुम्हारी साँसो में बस जाएँ हम

ये जिन्दगी यूँही गुजर जाये

तो न रहे कोई गम

चाहत से सराबोर हैं

तुम्हरे प्यार में मदहोश है

बहते झरने के मीठे जल

की मीठास लिए

मोहब्बत में अपने होठो को सिए

कुछ कह रही हैं

तुम्हारी खामोशियाँ

जैसे चाह रही है

थोड़ी और नजदिकिया

05 Aug

आशा को तुम्हारी|

आशा को तुम्हारी

तन्नाओ को हमारी

चाहत को तुम्हारी

कोशिशों को हमारी

मंजिलो के दायरे में खुद को यूँ बांध दिया था

क्यूकि अपनों की खातिर ठानी थी कुछ करने की

फिर अपनों ने ही सवाल किये

अपनों ने ही इलजाम दिए

बेहतरी को उनकी मुकाम समझा था

इस बीच उन्होंने हमें न जाने क्या क्या समझा था

कहते हैं जख्म और जहर हम ही से हैं

उन्हें नहीं पता फ़िकर में उनकी हम कब ही से हैं

कुछ साल गुज़र जाने दो

दौर वो भी जल्द आएगा

जब तुम्हारे दिल में भी बस नाम हमार रह जायेगा

बस नाम हमारा रह जाएगा

17 Jun

वहीं तो रचा बसा होता हैं

बेदहसाब किताबे पढ़
कुछ कलमे गढ़
अनजानो ने सराहा
कभी कभी
मलिते मलिते
वो पा जाते हैं दोराहा
उन्हें भाता है रिश्तो का चोराहा
मलिने की आड़ में
खुद की पहचान में
वो बस चाहते हैं इक किनारा
वहीं तो रचा बसा होता हैं
उनकी खुशियों का नज़ारा
तो क्यूँ ना एक बार
ख्वाहिशो को अपनी
बहन दे मंजिलों तक अपनी
जहां बसती हो ऐसी बस्ती
आओ मिलकर करें
कुछ ऐसी करनी

17 Jun

दिल की दरख्वास्त

इस रूह का एक ही मकसद
इश्क में जियें
इश्क में खिलें
इश्क में उडें
इश्क में डाले
एक दूजे की बाहों में
बाहों के हार
नज़रों में तेरी करें
अपनी मंजिलो की तलाश
और बह चले
उन हवाओं की सनसनाती रुत में
जहां हो तो सिर्फ तेरे प्यार की प्यास
कुछ ऐसी ही है
इस छोटे से दिल की दरख्वास्त

17 Jun

मेरी आह निकल रही

कशिश तेरी आखों की
मेरे दिल में
यूँ जगह कर रही
दबी जबान से जैसे
मेरी आह निकल रही
मुस्कान तुम्हारी
होठों पर कुछ यूँ बिखर रही
बड़ी मुश्किल में हैं
हमारी जान
देखो अब कहीं जाके
हमारी सांसें संभल रही

17 Jun

कुछ कहना चाह रही थी

आज वो फिर नज़र आयी
धुंधलाती सी तस्वीर में
रंगों की रंगत ने
जैसे करामात दिखलाई
आज कुछ नया सा एहसास है
उसके हाथों में फिर मेरा हाथ है
लकीरों को खिंचने की चाहत लिए
वो खिलखिलायी
और वो हमारे करीब आयी
नदियों की धारा को लिए
वो बहती ही जा रही थी
धीरे धीरे आँखों में उसकी
शर्म सी छा रही थी
शायद
शायद वो
कुछ कहना चाह रही थी
आज वो हमें फिर से अपना
बना रही थी

17 Jun

राहों में तेरी

वक़्त तो वक़्त है
गुजर जायेगा
पानी भी अपनी राह
खुद ही बनाएगा
राहों में तेरी
मेरा आना
यूँही लगा रहेगा
कोई कुछ कहे
मेरा प्यार तुम्हे
यूँही मिलता रहेगा
जमाने गुजर जायेंगे
हम तुम फिर ना जाने
कितनी दफा
लौट लौट कर आयेंगे

17 Jun

मेरी दुनिया बस तुम्ही में

इजाज़त हो जो आपकी
कुछ कहें
बस एक पल को हम आपकी
बाहों में रहे
उल्फतों में उलझने उलझ
रही हैं
मेरी दुनिया बस तुम्ही में
सिमट रही हैं
गिरफ्त की तुम्हारी
आदत हो चली है रानी
तुम्ही से तुम्ही तक है सिमटी
हम और हमारी कहानी

17 Jun

वक़्त कुछ ऐसा बदला

तुझसे मिलने में वो बात है
की भीगे मेरे ज़ज्बात हैं
एक ऐसा मुकाम जो
तेरे साथ साथ
हम पा गए
साथ मिला तेरा
और हम खुद को
खुद ही से हार गए
एक वक़्त था जब
खुदा से मिलने की खातिर
राहो को अपनी हम निहार रहे थे
वक़्त कुछ ऐसा बदला
हवा ने रूह कुछ यूँ पलटा की
हम जुल्फे तुम्हारी संवारने में
वक़्त अपना गुजार रहे थे