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18 Aug

जिसे देखो उस ओर भाग रहा हैं

Inspirational poetry

Jise dekho us or bhag raha hai

जिसे देखो उस ओर भाग रहा हैं

सच कह दो तो

आँखे तान रहा हैं

गफलत सी जिन्दगी हो गयी हैं’

फिर भी सीना ठोक रहा हैं

क्यों भला इंसान अनजाना हो रहा

खुद के है लड़खड़ाते कदम

और ज़माने को सभाल रहा

नजरो की शर्म बची नही

जोश जिन्दगी का

धुआं धुआं हो गया

होश जब आया तो एहसास हुआ

जिन्दगी का साथ

कही पीछे ही छुट गया

Jise dekho us or bhag raha hai

17 Aug

किस चिंता में मैं दौड़ चला

किस चिंता में मैं दौड़ चला

उस बेरंग दिशा की और

देखा तो शर्मिंदा हुआ

सोच में पड़ा

क्यों पकड़ी ऐसी पतंग की डोर

सोच में मेरी क्यों खोट हुई

क्यों मन आँगन आया मेर चोर

भटकन को मजबूर हुआ

ठोकर खायी सो मजबूत हुआ

भले-बुरे का बोध हुआ

और हमने फिर सोच लिया

धीरे धीरे ही सही

पहुंचेगे कही न कहीं

जहा होगी हमारी भी पहचान

कहलायेगे इक दिन

हम भी एक इन्सान