हिम्मत तुम्हारी ही थी

16 Jun हिम्मत तुम्हारी ही थी

आज फिर पंख अपने संभल रहे हैं
उड़ने की चाहत है
उस आस्मां को निहार रहे हैं
मोहब्बत किस अदा का नाम है
जानना चाहते हो
एक ऐसी जिन्दगी में शामिल
होना चाहते हो
जहाँ रंग बिखरे पड़े हैं
बस प्यार में दिल उलझे पड़े हैं
फितरत नहीं मेरी की कुछ यूँही कह्दूं
किम्मत तुम्हारी ही थी
की सोचा एक दफा फिर से उड़ान भरलूँ