मैं तुमको चाह कर भी

10 Aug मैं तुमको चाह कर भी

मैं तुमको चाह कर भी

चाह ना सका

मैं तुमको पा कर भी

पा न सका

अब अंधेरे में तुम्हारी

जुस्तजू की

क्यूँ फिर हमने तुम्हारी आबरू

की कद्र ना की

सब्र कैसे करे की

हम सदमे में हैं

किससे कहें

बेहतर होता की

वक्त पे काबू रख पाते

हम उन पलो के

दाग धो पाते

काश तुम जब भी कही जाती

हम तुम्हारे साथ हो जाते