प्यार तुम्हारा पाया

09 Aug प्यार तुम्हारा पाया

प्यार तुम्हारा पाया

रोशन हुआ मेरा साया

रात हो या दोपहर

बरसा रही हो

अपने हुस्न का कहर

जिस्म में लगी है आग

तुम्हे छूने भर से

तुम्हे पाने की ख्वाहिश रखते हैं

न जाने कब से

प्यास के अंगारे को और न भडकाओ

तडप रहा हूँ में

मेरी यह आग बुझाओ

आओ जरा पास हमारे

और प्यार की अलख जगाओ