सपनों की दुनिया

11 Aug सपनों की दुनिया

सपनों की दुनिया

में हकीकत के फ़साने

बंद आँखों के सपने

होते हैं लुभावने

दुनिया क्या जाने

मेरे सपनों की कीमत

मेरी मोहब्बत ही है

मेरी ज़ीनत

क्या कह रहा हूँ

क्या सोचा रहा हूँ

हकीकत से

दो दो हाथ कर रहा हूँ

एक गैर की चाहत में

दिन रात एक कर रहा हूँ

उस खुदा की रहमत हो

बस यही इन्तजार कर रहा हूँ

बस कुछ करने की ख्वाहिश थी

पर अपनों की खातिर

आज उनके ख्वाबो को जी रहा हूँ